किसान आंदोलन- 15 अगस्त पर जहां शान से लहराता है तिरंगा, वहां किसानों ने फहराया अपना झंडा,तो भड़के शशि थरूर

सालों से जिस जगह पर देश के प्रधानमंत्री 15 अगस्त के दिन तिरंगा लहराते आए हैं वहीं आज एक दूसरा झंडा लगा देख पूरा देश हैरान रह गया। दरअसल, आज गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली जिसके कुछ ही देर बाद रैली ने पूरे दिल्ली में हिंसा का रूप ले लिया

सालों से जिस जगह पर देश के प्रधानमंत्री 15 अगस्त के दिन तिरंगा लहराते आए हैं वहीं आज एक दूसरा झंडा लगा देख पूरा देश हैरान रह गया। दरअसल, आज गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली जिसके कुछ ही देर बाद रैली ने पूरे दिल्ली में हिंसा का रूप ले लिया, इतना ही नहीं ट्रैक्टर रैली दिल्ली के लाल किले तक पहुंच गई और जहां  15 अगस्त के दिन पर प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से राष्‍ट्रध्‍वज फहराते हैं। इस ऐतिहासिक इमारत की उसी प्राचीर पर गणतंत्र दिवस के दिन कोई और झंडा फहर रहा था। 

लाल किले की प्राचीर पर कोई और झंडा फहरता देख लोग हैरान रह गए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्वीट किया है कि सबसे दुर्भाग्‍यपूर्ण। मैंने शुरुआत से किसानों के प्रदर्शन का समर्थन किया है लेकिन मैं अराजकता की अनदेखी नहीं कर सकता। गणतंत्र दिवस के दिन कोई और झंडा नहीं, केवल तिरंगा ही लाल किले पर फहरना चाहिए। कांग्रेस के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍त जयवीर शेरगिल ने भी यही बात कही। 

बीजेपी नेता रमेश नायडू ने लिखा कि दिल्‍ली की सीमाओं से शुरू हुई भीड़ ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़े, तलवारें लहराईं। यहां तक कि हमारे सुरक्षा बलों के प्रतिरोध के बावजूद लाल किले तक पहुंच गए।

करीब एक घंटे तक ये उपद्रव चलता रहा। इसके बाद किसान नेताओं ने अपील की, सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया और तब प्रदर्शनकारियों को प्राचीर से हटाया जा सका, लेकिन उन्हें लाल किले से हटाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। ऐहतियातन इस इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया गया है।

बतां दें कि किसानों का जो रूट पुलिस ने तय किया था, उसमें लाल किला कहीं नहीं आता। सिंघु बॉर्डर से जो किसान दिल्ली में दाखिल हुए, वही रूट तोड़कर लाल किले की ओर बढ़ गए। संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से उन्हें आउटर प्वाइंट की तरफ जाना था, लेकिन उधर ना जाकर वो लाल किले की तरफ मुड़ गए। मुबारका चौक पर कुछ किसानों को पुलिस ने रोका भी, लेकिन हाथापाई के बाद पुलिस हट गई और वहां हजारों किसान जमा हो गए। इसके बाद ये सभी लाल किले में दाखिल हुए। लाल किले के बाहर किसानों ने अपने ट्रैक्टर खड़े कर दिए।

वहीं इसके बीच लाल किले पर पुलिस प्रदर्शनकारियों को समझाती रही कि तिरंगा उतारकर अपने झंडे लगाना ठीक नहीं है, लेकिन वो नहीं माने। इस दौरान तिरंगे, किसान संगठनों के झंडों के अलावा वाम दलों का झंडा भी नजर आया। इस हिंसक और उग्र आंदोलन पर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि हम जानते हैं कि कौन परेशानी खड़ी करने की कोशिश कर रहा है। ये उन राजनीतिक दलों के लोग हैं, जो आंदोलन को बदनाम करना चाहते हैं।

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