अगले साल UP में होने वाले चुनावों में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं राकेश टिकैत के आंसू?

किसान नेता राकेश टिकैत के आंसूओं ने किसान आंदोलन का मानों रूख ही बदल दिया हो, इतना ही नहीं राकेश टिकैत के आंसू बीजेपी के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं। दरअसल, राकेश टिकैत के आंसुओं का असर यूपी के जाटलैंड मुजफ्फरनगर में देखने को मिल रहा है।

किसान नेता  राकेश टिकैत के आंसूओं ने किसान आंदोलन का मानों रूख ही बदल दिया हो, इतना ही नहीं राकेश टिकैत के आंसू बीजेपी के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं। दरअसल, राकेश टिकैत के आंसुओं का असर यूपी के जाटलैंड मुजफ्फरनगर में देखने को मिल रहा है। दिल्ली से 125 किमी दूर मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में शुक्रवार को भाकियू की महापंचायत में भीड़ का सैलाब उमड़ पड़ा। पंचायत के माहौल में बीजेपी सरकार के प्रति नाराजगी साफ नजर आई। 

नरेश टिकैत समेत कई खाप चौधरियों ने कहा कि अब किसान भाई हमेशा बीजेपी से होशियार रहें। किसान समुदाय में गुस्सा इस कदर है कि मुजफ्फरनगर के स्थानीय बीजेपी सांसद संजीव बालियान के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। खाप चौधरियों का कहना था कि गाजीपुर बॉर्डर पर जो हुआ, वह भाकियू या राकेश टिकैत को नहीं बल्कि पूरे जाट समुदाय को सीधी चुनौती है।

आपकों बतां दें कि नरेश टिकैत जाटों की बालियान खाप के चौधरी भी हैं। इसलिए पंचायत में इस खाप के किसान बड़ी तादाद में थे, लेकिन भाजपा के स्थानीय सांसद संजीव बालियान को लेकर बिरादरी के किसानों के तेवर काफी तीखे नजर आ रहे थे। मंच पर जाटों की अन्य खापों के चौधरी भी थे। देशखाप चौधरी सुरेंद्र सिंह ने यहां तक कह डाला कि राकेश टिकैत की आंखों में आया पानी सड़कों पर सैलाब बनकर बहेगा और गाजीपुर जाकर रुकेगा। 

आपकों बतां दें कि परंपरागत तौर पर जाटों को चौधरी अजित सिंह का वोटर माना जाता था, लेकिन मुजफ्फरनगर दंगों के बाद 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जाट बीजेपी की तरफ मुड़ गए। नतीजा यह हुआ कि जाटों की सियासत करने वाले चौधरी चरण सिंह के बेटे अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल जीरो पर पहुंच गई, लेकिन अब जैसा माहौल है, वह बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकता है। यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं और वेस्ट यूपी में जाट वोट खासा महत्व रखता है।

यूपी में जाटों की आबादी 6 से 8% है, जबकि पश्चिमी यूपी में वो 17% से ज्यादा हैं। कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बुलंदशहर, हाथरस, अलीगढ़, नगीना, फतेहपुर सीकरी और फिरोजाबाद वेस्ट यूपी की ऐसी 17 लोकसभा सीटें हैं , जहां जाट वोट बैंक चुनावी नतीजों पर सीधा असर डालता है। राज्य की 120 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां जाट वोट बैंक असर रखता है। 

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