निठारी कांड में सीबीआई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला- 12वें केस में भी सजा-ए-मौत, आरोपी बोला मेरे नसीब में फांसी ही है

नोएडा में साल 2006 में हुए निठारी कांड में सीबीआई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया। बतां दें कि इस भयावह मामले की जांच कर रही सीबीआई टीम को जांच पड़ताल के दौरान मानव अंगों से भरे कई थैले मिले थे।

नोएडा में साल 2006 में हुए निठारी कांड में सीबीआई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया। बतां दें कि इस भयावह मामले की जांच कर रही सीबीआई टीम को जांच पड़ताल के दौरान मानव अंगों से भरे कई थैले मिले थे। 319 दिनों तक सुनवाई के बाद गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने युवती से दुष्कर्म और हत्या के 12वें मामले में दोषी करार दिए गए नौकर सुरेंद्र कोली को शनिवार को फांसी की सजा सुना दी।

दोषी पर 1 लाख 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। सजा के ऐलान के बाद सुरेंद्र कोली को वापस जेल ले जाया जा रहा था। इस बीच उसने कहा कि मेरे नसीब में तो फांसी ही है। निठारी मामले में कुल 17 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 12 मामलों में फैसला सुनाया गया। इन सभी में सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा दी गई है।

शुक्रवार को निठारी कांड के 12वें केस में सुरेंद्र कोली को दोषी करार दिया गया। हालांकि, सबूतों की कमी के चलते मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया गया। बता दें कि निठारी कांड का खुलासा 7 मई 2006 को लापता लड़की पायल की वजह से हुआ था।

9 सितंबर 2014, सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जानी थी। कोली को मेरठ जेल की एक हाई सिक्यॉरिटी वाली बैरक में रखा गया। तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी बीच सुरेंद्र कोली की फांसी पर रोक से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर जेल प्रशासन को तड़के तकरीबन 4 बजे मेरठ के डीएम के जरिए मिला। इस बात की जानकारी खुद तत्कालीन वरिष्ठ जेल अधीक्षक मोहम्मद हुसैन मुस्तफा ने दी थी।

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