जानिए, देश में पहली बार कब लागू किया गया था इनकम टैक्स कानून, पहले सालाना छूट की सीमा 200 रुपए थी, अब हुई 2.5 लाख

देश की वित्तमंत्री निर्मला सितारमण आज संसद में पहली बार पेपरलेस बजट पेश करेंगी, वहीं सभी सेक्टर की निगाहें इस बजट पर टिकी हुईं है कि किसके हिस्से में क्या आने वाला है। कोरोना संकंट के बाद यह बजट और भी बेहद खास है, बेरोजगारी को लेकर भी देश की निगाहें इस बजट पर बनीं हुई है।

देश की वित्तमंत्री निर्मला सितारमण आज संसद में पहली बार पेपरलेस बजट पेश करेंगी, वहीं सभी सेक्टर की निगाहें इस बजट पर टिकी हुईं है कि किसके हिस्से में क्या आने वाला है। कोरोना संकंट के बाद यह बजट और भी बेहद खास है, बेरोजगारी को लेकर भी देश की निगाहें इस बजट पर बनीं हुई है। 

वहीं इससे पहले क्या आप जानते जो हार साल हम टैक्स सरकार को पेय करते हैं वह देश में कब लागू किया गया था। तो आईए इस अहम जानकारी पर एक नज़र डालते हैं। बतां दे कि देश में इनकम टैक्स का पहला कानून 160 साल पहले आया था। 1860 में अंग्रेज अफसर जेम्स विल्सन ने पहला बजट पेश किया था। इसी में इनकम टैक्स कानून को जोड़ा गया था। देश के पहले बजट में 200 रुपए तक की सालाना कमाई वालों को इनकम टैक्स में छूट दी गई थी। अभी देश में 1961 का आयकर कानून लागू है। इसमें समय-समय पर संशोधन होते रहते हैं।

 200 रुपए से ज्यादा की कमाई पर लगता था इनकम टैक्स -

1860 में देश के पहले बजट में 200 रुपए से 500 रुपए तक की सालाना कमाई करने वालों पर टैक्स लगता था। सालाना 200 रुपए से ज्यादा कमाने वालों पर 2% और 500 रुपए से ज्यादा कमाने वालों पर 4% टैक्स लगाने का प्रावधान किया गया था। इनकम टैक्स कानून में सेना, नौसेना और पुलिस कर्मचारियों को छूट दी गई थी। हालांकि, उस समय ज्यादातर कर्मचारी अंग्रेज ही थे। सेना के कैप्टन का सालाना वेतन 4,980 रुपए और नौसेना के लेफ्टिनेंट का सालाना वेतन 2,100 रुपए था। हालांकि, इनकम टैक्स के कानून का उस समय कड़ा विरोध हुआ था। उस समय के मद्रास प्रांत के गवर्नर सर चार्ल्स टेवेलियन ने भी विरोध किया था। विल्सन का ये कानून ब्रिटेन के इनकम टैक्स कानून की तरह ही था। ब्रिटेन में 1798 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विलियम पिट ने भी सेना का खर्च निकालने के लिए इनकम टैक्स कानून बनाया था।

 1857 में भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की थी हुक्मत-

आपकों बतां दें कि 1857 में भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की हुक्मत थी, इस दौरान भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर दी। इससे देशभर में आंदोलन छिड़ गया। इससे निपटने के लिए अंग्रेजों ने अपनी सेना के खर्च में बेहिसाब बढ़ोतरी कर दी। 1856-57 में अंग्रेजों ने सेना पर 1 करोड़ 14 लाख पाउंड खर्च किए थे। यह खर्च 1857-58 में बढ़ाकर 2 करोड़ 10 लाख पाउंड तक कर दिया गया। उस जमाने में 1 पाउंड 10 रुपए के बराबर था। 1 नवंबर 1858 में ब्रिटेन की तत्कालीन महारानी विक्टोरिया ने ऐलान किया था कि अब भारत में ब्रिटिश सरकार की ही हुकूमत होगी। इसी दौरान 'द गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858' आया। इस कानून के प्रावधानों के मुताबिक भारत के सभी आर्थिक मामलों का नियंत्रण भारत के पहले मंत्री (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) चार्ल्स वुड के हाथों में आ गया।

अंग्रेजों पर कर्जा हुआ, तो इनकम टैक्स लगाया गया-

1857 की क्रांति की वजह से 1859 में इंग्लैंड का कर्ज 8 करोड़ 10 लाख पाउंड पहुंच गया। इस समस्या से निपटने के लिए ब्रिटेन ने नवंबर 1859 में जेम्स विल्सन को भारत भेजा। विल्सन ब्रिटेन के चार्टर्ड स्टैंडर्ड बैंक के संस्थापक और अर्थशास्त्री थे। उन्हें भारत में वायसराय लॉर्ड कैनिंग की काउंसिल में फाइनेंस मेंबर (वित्त मंत्री) बना दिया गया। विल्सन ने 18 फरवरी 1860 को भारत का पहला बजट पेश किया। पहले ही बजट में पहली बार तीन टैक्स का प्रस्ताव दिया गया। पहला- इनकम टैक्स, दूसरा- लाइसेंस टैक्स और तीसरा- तंबाकू टैक्स। इन तीनों टैक्सों की घोषणा करते समय विल्सन ने मनुस्मृति का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका ये कदम 'इंडियन' नहीं बल्कि 'भारतीय' ही है।

1922 में आयकर विभाग बना-

-असहयोग आंदोलन के समय 1922 में भारत में नया इनकम टैक्स कानून आया। नए कानून में आयकर अधिकारियों को अलग-अलग नाम दिए गए। 1946 में पहली बार परीक्षा के जरिए आयकर अधिकारियों की सीधी भर्ती हुई। इसी परीक्षा को ही 1953 में 'इंडियन रेवेन्यू सर्विस' यानी 'IRS' नाम दिया गया।

-1963 तक आयकर विभाग के पास संपत्ति कर, सामान्य कर, प्रवर्तन निदेशालय जैसे प्रशासनिक काम थे। इसलिए 1963 में राजस्व अधिनियम केंद्रीय बोर्ड कानून आया, जिसके तहत केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) का गठन किया गया।

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