भंडारा अस्पताल में 10 बच्चों की मौत पर उठे सवाल, मंत्री तक को थी खबर अस्पताल में न तो लगे थे फायर सेफ्टी, ना ही निकलने का कोई दूसरा रास्ता

महाराष्ट्र के भंडारा अस्पताल में लगी भीषण आग में 10 मासूम बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी लेकिन इसका जिम्मेदार कौन है, इस मामले हुई जांच में चौंका देने वाली रिपोर्ट सामने आई है कि अस्पताल में आग बुझाने के न तो कोई इंतजाम थे ना ही अस्पताल से बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता था।

महाराष्ट्र के भंडारा अस्पताल में लगी भीषण आग में 10 मासूम बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी लेकिन इसका जिम्मेदार कौन है,  इस मामले हुई जांच में चौंका देने वाली रिपोर्ट सामने आई है कि अस्पताल में आग बुझाने के न तो कोई इंतजाम  थे ना ही अस्पताल से बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता था। बतां दें कि दो साल पहले एक RTI में यह खुलासा हुआ था, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। 

साल 2018 में एक RTI लगाई थी जिसमें पता चला था कि अस्पताल में फायर सेफ्टी के लिए जरूरी एक भी इंतजाम नहीं किया गया था। हादसा होने पर बाहर निकलने का दूसरा कोई रास्ता भी नहीं था। एक रिपोर्ट के अनुसार, RTI में जितने भी सवाल पूछे गए थे, उनका जवाब 'NO' में दिया गया था।

भंडारा के RTI एक्टिविस्ट विकास मदनकर ने एक अखबार को जानकारी देते हुए बताया कि 2018 में उत्तर प्रदेश के एक हॉस्पिटल में भीषण आग लगी थी, इसके बाद मेरे दिमाग में आया कि क्यों न अपने जिले के हॉस्पिटल्स में फायर सेफ्टी को लेकर जानकारी हासिल की जाए। इसी कड़ी में मैंने 2018 की शुरुआत में एक RTI दायर कर यहां लगे फायर उपकरणों की जानकारी मांगी थी।

मदनकर ने आगे बताया कि 6 महीने बाद RTI का जवाब आया, जिसमें यह खुलासा हुआ कि हॉस्पिटल के पास कोई भी आग बुझाने की सुविधा नहीं है। इस गंभीर लापरवाही का पता चलने के बाद मैंने तब राज्य की फडणवीस सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे चंद्रशेखर बावनकुले से मुलाकात की थी और उनसे इस पर कार्रवाई करने को कहा था। उन्होंने मुझे वादा किया था कि वे जल्द ही इस संबंध में सीएम से बात करके उचित निर्णय लेंगे। हालांकि, इसके कुछ दिनों बाद राज्य में चुनाव आ गए और सत्ता परिवर्तन हो गया।


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